सुनो, ❤️
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| Anand Maurya Taybu |
एक दीवाली फिर से आने वाली है सूमो मेरी
फिर तुम्हारे नाम का दीपक जलेगा
जानता हूँ मैं तुम्हारा कुछ नहीं पर
एक धुंधली लौ जला रखी है मैंने
जन्म अगला लूंगा जब तुम मिलोगी
शर्त इतनी सी लगा रखी है मैंने
इस हृदय ने मान रखी है नियति
इस जन्म तो ये अकेला ही चलेगा
एक दीवाली फिर से आने वाली है सूमो मेरी
फिर तुम्हारे नाम का दीपक जलेगा
तुम हो शोभा एक आंगन की प्रिये अब
मुझको अपने स्वप्न में न पाती होगी
जो भी पहला दीप बुझ जाए तुम्हारा
तुम समझना वह ही मेरी बाती होगी
किंतु जितनी देर मैं देहरी जलूंगा
हर खुशी का रास्ता तुम पर खुलेगा
एक दीवाली फिर से आने वाली है सूमो मेरी
फिर तुम्हारे नाम का दीपक जलेगा
इस बार जब अपने घर को तुम सजाना
साफ कर लेना अपने कमरे का दर्पण
याद आये तो ज़रा सा मुस्कुराना
जो तुम्हारे नाम था मेरा समर्पण
मैं वो कच्ची मिट्टी का हूँ दीप तेरा
आँख में काजल जो बन कर के घुलेगा
एक दीवाली फिर से आने वाली है सूमो मेरी
फिर तुम्हारे नाम का दीपक जलेगा
सोचता हूँ इस बार की मैं फुलझड़ी में
स्वाह कर दूं मैं भी अपने इस सपन को
किंतु कैसे सत्य को स्वीकार कर लूं
बोल कर क्या समझाऊं मैं अपने मन को
दीप जो तेरा ही जल रहा है मुझमे
मेरी अंतिम साँस तक न ये बुझेगा
एक दीवाली फिर से आने वाली है सूमो मेरी
फिर तुम्हारे नाम का दीपक जलेगा ❤️


